यह जो चुप्पी साध लेते हो
सच के घिनोने चेहरे देखकर
यह जो मुंह मोड़ने की आदत है तुम्हारी
सब असुखद समाचारों से
डरावनी हैं यह सभी प्रवृतियाँ
क्या करोगे जब ऐसी ही कोई
भयावह हकीकत
आ खड़ी होगी
एक सुबह तुम्हारी चौखट पर
कबूतरों जैसे
आँखें मूंद लेने से
जब तक न भागेगी बिल्ली
तब तक और एक ,एक और,
और एक दिल्ली